मोदी के जन्म के “वक्त” पर भारत ने दी थी इजरायल को मान्यता
नई दिल्ली। भारत ने इजरायल को जिस “दिन” और जिस “वक्त”
मान्यता दी थी, उसी दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्म हुआ था और इसके
64 साल बाद मोदी के रूप में भारतीय प्रधानमंत्री पहली बार इजरायल की
यात्रा पर जाएंगे। इजरायल के राजदूत डैनियल कारमन प्रधानमंत्री नरेन्द्र
मोदी के नेतृत्व में उनके देश के साथ भारत के संबंधों के भविष्य और उनकी
आगामी तेल अवीव यात्रा को लेकर दैवीय संयोग देखते हैं।
उन्होंने कहा, “संभव है कि यह कोई दैवीय योजना हो।”
इजरायली राजदूत ने विशेष बातचीत में कहा कि भारत और इजरायल के बीच आधिकारिक
एवं कूटनीतिक रिश्ते 1992 में कायम हुए हों लेकिन भारत ने ब्रिटिश शासन से
आकाद होने के बाद इजरायल को एक देश के रूप में आधिकारिक मान्यता “उसी दिन”
और “उसी वक्त” दी थी, जब मोदी का जन्म हुआ था यानी 17 सितंबर 1950 को ।
उन्होंने कहा कि हो सकता है कि मोदी की इजरायल यात्रा भी
एक दैवीय संयोग हो। उन्होंने आशा जताई कि मोदी की इजरायल यात्रा “जल्दी”
ही होगी। कारमन ने कहा कि इजरायल में मोदी की यात्रा को लेकर बहुत उत्साह
है। उनकी बहुत उत्सुकता से प्रतीक्षा की जा रही है। मोदी की यात्रा महज
सांकेतिक नहीं होगी और घोषणाओं के आगे जाकर ऎसे ठोस नतीजों वाली होगी जो
कामीन पर दिखायी देंगे। कारमन ने क हा कि यह भी एक संयोग है कि वह भारत में
राजदूत के रूप में ठीक एक साल पूरा करने के मौके पर यह बातचीत कर रहे हैं।
भारत एवं इजरायल के बीच राजनयिक संबंध 1992 में तत्कालीन
प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव के कार्यकाल में कायम हुए थे। पर दोनों
देशों के बीच कोई द्विपक्षीय शीर्षस्तरीय यात्राएं नहीं हुईं। संयोगवश
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के शासनकाल में तत्कालीन प्रधानमंत्री
अटलबिहारी वाजपेयी ने पहली बार अपने विदेश मंत्री जसवंत सिंह को इजरायल
भेजा था।
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