होटल मैनेजमेंट की पढाई करने वाले शाकाहारी छात्रों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार एक प्रस्ताव पर विचार कर रही है कि होटल मैनेजमेंट कर रहे छात्र क्या मांसाहारी खाना बनाने से खुद को अलग कर सकते हैं। गौरतलब है कि मौजूदा समय में होटल मैनेजमेंट में मांसाहारी खाना बनाना अनिवार्य है।

केंद्र इस विषय में सहमति बनाने की कोशिश कर रहा हैं कि होटल मैनेजमेंट के छात्रों को उनकी मर्जी न होने पर भी मांसाहारी खाना बनाना सीखने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए या नहीं।

वैसे तो काफी समय से विभिन्न संस्थाओं द्वारा इस प्रकार की मांग अपने-अपने स्तर पर उठाई जा रही थी परन्तु केन्द्रीय कपडा मंत्री संतोष गंगवार द्वारा केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी और पर्यटन मंत्री महेश शर्मा को लिखे गए एक पत्र के बाद यह विषय पुनः चर्चा में आया है। पत्र में लिखा है कि ऐसे पाठ्यक्रमों में छात्रों की मर्जी के खिलाफ उन्हें मांसाहारी खाना बनाना सीखने के लिए बाध्य करना सही नहीं है। संतोष गंगवार का कहना है कि इस तरह की बाध्यता के कारण कई शाकाहारी लड़के-लड़कियां इस तरह के पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने से हिचकते हैं।

गंगवार द्वारा लिखी गई चिट्ठी में सर्वे का हवाला देते हुए लिखा गया है कि भारत की 40 फीसद से भी ज्यादा आबादी शाकाहारी है तथा हिंदू, जैन, ब्राह्मण, वैश्य और कई शाकाहारी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लड़के-लड़कियां होटल मैनेजमेंट के पाठ्यक्रम में दाखिला नहीं ले पाते हैं।

उनका कहना है कि यह एक गंभीर मुद्दा है जिसपर बहस किए जाने की जरूरत है। वह यह भी कहते हैं कि वह मांसाहार के खिलाफ नहीं हैं, इसलिए उन्होंने मांसाहारी खाना बनाना सीखने को वैकल्पिक बनाने की बात कही है। संतोष गंगवार इस मामले में सहमति बनाने के लिए सांसदों से इस मुद्दे को संसद में उठाने के सिलसिले में भी बात करेंगे।

जानकारी के अनुसार भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, भारतीय जनता युवा मोर्चा अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने भी संतोष गंगवार की मांग का समर्थन किया है। पुणे के एक CA सी.आर.लूनिया द्वारा www.change.org पर मांसाहारी खाना बनाना सीखने को वैकल्पिक बनाने संबंधी डाली गई पेटिशन को अब तक 2500 हस्ताक्षर मिल चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के फूड एंड ऐग्रिकल्चर ऑर्गनाइजेशन द्वारा साल 2007 में प्रकाशित एक लेख में भारतीयों को विश्व में सबसे कम मीट खाने वाला समुदाय माना गया था।